एक ब्रैड बेचने वाले लड़के ने कैसे खड़ी करी करोड़ो की कम्पनी –

आज जिन शक्स के बारे में बताने जा रहा हूँ | उनकी भी बहुत मोटीवेट कहानी है | जो हम उम्मीद करते है कि हर युवा को आगे बढ़ने के लिए व अपने लक्ष्य को पाने के लिए हमेशा प्रेरित करेगी | इन शक्स ने कम उम्र में मेहनत करना सीख लिया |

छोटे से गाँव से होने के बावजूद इस युवा ने साइकिल से ब्रैड बैच कर, पैदल चल चलकर सिमकार्ड बेचकर , एक गार्ड की छोटी सी जॉब करने के बाद कड़ी मेहनत व लगन के साथ कैसे कुछ वर्षो में ही करोड़ो कम्पनी खड़ी कर दी |

जिसका सालाना टर्न ओवर करोड़ो में है | चलिए शुरू करते है इस युवा की एक उत्साह भर देने वाली , एक जोश व प्रेणना देने वाली मोटीवेट स्टोरी |

हम बात कर रहे है विकास उपाध्याय की , विकास उपाध्याय उत्तर प्रेदश के जालोन जिला के रामपुरा गाँव के निवासी है | जिनके पिता जी एक किराना की छोटी सी दुकान चलाते थे | और उस छोटी सी दुकान से उनके परिवार का हरण पोषण किया जाता |

जिंदगी की शुरुआती मुश्किले-

पिता जी उस दुकान से अपने परिवार को पालते | और विकास उपाध्याय अपनी पढाई पर फोकस करते | उस वक़्त विकास की उम्र सिर्फ 9 वर्ष थी | कुछ समय बाद पता लगा की विकास की माँ को टीवी बीमारी है | जो की बहुत बड़ी बीमारी थी |

जिसमे विकास के पापा उस छोटी सी दुकान से उनकी बीमारी का खर्चा नहीं उठा पा रहे थे जिस वजह से उन्होंने बहुत कर्ज ले लिया | और उस कर्ज को हटाने के लिए उन्होंने सोचा की यह दिल्ली आ कर वो जॉब करेंगे | और दिल्ली आ कर उन्होंने गार्ड की नोकरी की |

विकास पर अब घर का सभी बोझ आ चुका था | वो अब अपनी दुकान पर बेठने लगे | और घर की थोड़ी मदद करने लगे | पर कुछ समय बाद ही कर्ज देने वालो ने अपना पैसा मागने लगे | जिस वजह से विकास के पिता जी ने अपनी छोटी सी दुकान बेच दी | और लोगो के पैसे चुका दिये | उस वक़्त विकास के परिवार के लिये एक एक पैसा का मोल बहुत अधिक था |

विकास सोचने लगे की इतनी कम उम्र में वो क्या कर सकते है जिससे परिवार की मदद हो सके | पर आखिर एक 9 साल का बच्चा क्या कर सकता था ? विकास सोचने लगे और एक सुबह वो जाग के उठे और उनके कानो में आवाज आई ब्रेड ले लो …ब्रेड ले लो  …वो आवाज कुछ बच्चो की थी |

वो आवाज उनकी मंजिलो तक पहुचने का एक संकेत था जिसको विकास ने महसूस किया और वो अपनी पहली कमाई करने निकल गये | उससे उनका घर तो नही चल पा रहा था पर कुछ तो पैसे आ रहे थे | जिससे कुछ तो मदद हो रही थी |

एक कम उम्र का बच्चा सोचने लगा की वो और क्या कर सकता है जिससे कुछ और पैसे आये | विकास ने एक दिन देखा की किसान अपनी फसल जैसे गेंहू अनाज लाया करते और दुकानदारो को बेच देते और दुकान दार लोगो को बेचते |

विकास ने भी कुछ पैसे जमा कर के वो अनाज लेना शुरू किया एक पेड़ के नीचे अपना बोरा बिछाकर लोगो को बेचने लगे | और ऐसा करने से वो अब कुछ हद  तक अपने परिवार की मदद करने लगे |

माँ ने प्रेरित किया पढने को-

इसी बीच उनके 10वी का रिजल्ट आया जिसमे वो 3rd डीविजन से पास हुए | तब उन्हें ऐसास हुआ की उन्हें आगे पढना चाहिए | और उनकी माँ ने अपने गहने बेच कर उरई शहर में विकास को पढने भेज दिया | विकास ने सोच लिया था कि वो अपनी पढाई का खर्च खुद उठाएंगे |

विकास  सिमकार्ड का काम करने लगे और गली गली जा कर बेचने लगे उस वक़्त सिमकार्ड पर बहुत अच्छा मुनाफा हो जाता था | विकास ने दिन में सिमकार्ड बेचे और रात में अपनी पढाई को वक़्त दिया | सिमकार्ड से वो महीने के अच्छे पैसे कामने लगे | और इतने में उनकी 12वी खत्म हो चुकी थी |

उन्हें आगे और पढना था और विकास ने आईटी ब्रांच से इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया | पर यहा भी बहुत मुश्किले थी |

इंजीनियरिंग के पैसे भरने के लिये उन्होंने अपने कमाये पैसे सब लगा दिये | फिर भी फीस अपूर्ण थी | विकास ने एक कंप्यूटर कोचिंग ज्वाइन कर लिया | जिससे वो बच्चो को अपने कंप्यूटर का ज्ञान पढ़ाते भी और उन्हें सिखने को भी मिलता |

क्योकि विकास ने आईटी ब्रांच तो ले ली थी | पर उससे पहले उन्होंने कभी भी कंप्यूटर को हाथ नहीं लगया था | पर धीरे धीरे सब ठीक हुआ | और उनकी इंजीनियरिंग पूरी हुई | जिसके बाद उन्हें लखनऊ शहर में एक छोटी सी जॉब भी मिल गयी |

जॉब को छोडकर कर बढे अपनी मंजिल की ओर-

जॉब मिल जाने के बाद उनका परिवार खुश था | पर कही न कही विकास खुश नहीं थे क्योकि उन्हें अपना business करना था | और जॉब को छोडकर कर , 4 हजार रूपए , कुछ कपडे और एक लैपटॉप लेकर वो आ गये उत्तर प्रदेश के नॉएडा शहर में | नॉएडा में कुछ दोस्तों के पास कुछ दिन रहे | परन्तु यहा भी धीमे धीमे सब पैसे खत्म हो गये | और वो बहुत उदास होने लगे |

उन्हें लगा की उनकी जॉब छोड़ने का विचार गलत था | अब यहा न खाने के लिये और न ही रहने के लिये छत थी | उसी बीच जिस बिलडिंग में वो रहते थे | उनके मालिक से विकास की मुलाक़ात हुई | और वो रियल स्टेट की कम्पनी चलाते थे जिसके लिये वो एक वेबसाइट बनाने वाले की तलाश कर रहे थे | और बस विकास को अपनी राह दिख गयी |

उन्होंने बिलडिंग के मालिक से कहा की में आपकी वेबसाइट बनाता हूँ | और विकास ने कुछ महीने में उनकी वेबसाइट बना कर लोंच कर दी | जिसके बदले में उन्हीने विकास को एक छोटी सी उसी बिलडिंग का बेसमेंट दे दिया | जहा विकास ने कई दिन गुजारे |

अपने काम को उसी जगह से करते और रात होने पर वही सो जाते | विकास दिन रात मेहनत करते गये | और अपने साथ एक टीम को बनाया | मेहनत और लगन से 2015 में विकास ने Dream steps नाम से अपनी IT company बनायीं | Dream step की एक ब्रांच कनाडा और दुबई में है | विकास की मेहनत और लगन से आज उनकी कम्पनी का टर्न ओवर करोड़ो में है |  

हमने आज इस article से क्या सिखा ?

हमने इस article के माध्यम से आप सभी को बताने का प्रयास किया है | कि किसी भी मंजिल तक पहुचने से पहले सबसे जरूरी कदम होता है …. शुरू करना | आप समझ गये होगे में क्या कहना चाहता हूँ | एक 9 साल का बच्चा जब शुरुआत कर सकता है तो आप क्यों नहीं |

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