100 रूपय कमाने वाली महिला का 1000 करोड़ रूपय तक का सफर-

एक नारी कितना सहन कर सकती है इसकी कल्पना हम पुरुष कभी भी नहीं कर सकते | और जब वो नारी कुछ करने की ठान ले तो वो हर मुकाम को हासिल कर सकती है | आप सभी का एक बार everythingpro.in के success story in hindi में स्वागत है |

आज जो हम success story बताने जा रहे है वो है एक 13 वर्ष की कल्पना सरोज की एक कहानी नहीं हकीकत है जो एक फिल्म की तरह लगती है पर यह मोटीवेट स्टोरी आपको नई उर्जा , नई प्रेणना देगी , जो आपके मुकाम तक पहुचाने में काफी हद तक मदद करेगी |

क्यों है सभी महिला के लिए प्रेणना-

कल्पना सरोज की कम उम्र महज 12 वर्ष की उम्र में, उनके मामा ने उनकी शादी की बात उनके पिता जी से की और कुछ ही दिनों में उनकी शादी हो गयी | शादी के बाद उन पर बहुत अत्याचार होने लगा | कल्पना जी ने जैसा एक सपना देखा हुआ था कि एक घर होगा अच्छे लोग होंगे परिवार होगा , पति प्यार व सम्मान देने वाला होगा | पर ऐसा कुछ भी नहीं हुआ |

कहते है यदि अपना पति अच्छा हुआ तो सारे दुःख दर्द कम हो जाता है | और धीरे धीरे सब ठीक हो जाता है | छोटी छोटी बात पर मारा-पीटी जो की बहुत ही दर्दनाक था |

अपनी जिन्दगी खत्म करने के लिए खटमल मारने वाली दवाई की तीन बोतल पी ली ताकि वो जीवित न रहे | पर किस्मत में कुछ और ही लिखा था | इन सब से बहार निकल कर उन्होंने अपने आप से बोला कुछ कर के मरना ही है तो क्यों न कुछ कर के ही जियें |

तमाम समस्या के बाद भी , और मात्र 9वी तक पढ़ी हुई लड़की ने आज 1000 करोड़ से भी अधिक की है मालकिन | जो आज महिलाओ के लिए प्रेणना बन के उभरी है |

कल्पना सरोज (kalpana saroj) की हकीकत –

बहुत ही साधारण परिवार में जन्मी कल्पना सरोज (kalpana saroj) का जन्म महाराष्ट्र के अकोला गाँव के एक छोटे से गाँव रोपड़ खेडा में 1961 में हुआ था | कल्पना सरोज के पिता जी महाराष्ट्र पुलिस के ह्बलदार थे | जिसमे उन्हें 300 रूपए वेतन मिला करता | जिससे उनका परिवार को पालते |

शादी हो जाने के बाद उनके साथ अत्याचार होने लगे जिसके बाद उनके पिता जी एक बार उनके पास गये व उनकी हालत देख कर वो उन्हे वहा से वापिस ले आये | कल्पना सरोज ने अब अपने आप से बोल चुकी थी की अब कुछ करना है और दुनिया के सामने अपने आपको साबीत करना है |

उन्होंने पहले सोचा की पहले वो पुलिस में ही जयेंगी पर पढाई व उम्र दोनों कम होने के कारण वो यह नहीं कर पायी | फिर उन्होंने सोचा की वो आर्मी में चली जाये ताकि देश के काम आ सकु पर ऐसा भी नहीं हो सका |

फिर उन्होंने अपनी माँ से बोला की वो कुछ करना चाहती है जिसके लिए उन्हें मुंबई जाना होगा | और अगर अपने नहीं जाने दिया तो में ट्रेन के नीचे आ जाउंगी ताकि कोई कसर न रह जाये मरने की | उनकी माँ ने पिता से बात कर के उन्हें मुंबई अपने चाचा जी के पास भेज दिया |

कुछ बढते कदम जिंदगी जीने कर लिए-

कल्पना सरोज अपने मुंबई में चाचा जी के पास आ गयी| उन्होंने अपने चाचा जी जो बताया कि वो सिलाई का काम जानती थी तो उनके चाचा जी ने सिलाई का काम एक फेक्ट्री में दिलवा दिया | परन्तु वो इतना अंदर से डरी हुई थी की वो सिलाई मशीन पर बेठने से डर रही थी | मशीन पर बेठने पर उनके हाथ कापने लगे और उनसे गलती होने के बाद वहा का incharge डाटने लगे |

जब फेक्ट्री के लोग लंच पर चले जाते तो वो सिलाई मशीन पर बेठ कर प्रयास करती ताकि वो डर खत्म हो सके | पर incharge ने उन्हें मशीन को छोडकर हेल्पर को तोर पर रख लिया जिसमे वो धागे को काटा करती | जिसका उन्हें 60 रूपए से 100 रूपय महिना मिलता | यह काम उन्होंने कुछ दिनों तक किया |

हुआ एक हादसा जिसने जिंदगी बदल दी-

कल्पना सरोज की जिंदगी कुछ हद तक पटरी पर आना शुरू हो गयी थी | परन्तु उनकी बहन को केंसर था | और एक दिन पैसे न होने के कारण उनका इलाज न हो सका और उनकी एक दिन मोत हो गयी |

इस घटना से कल्पना सरोज पूरी तरह से टूट गयी | और उन्होंने अपने आप से कहा यदि आज उनके पास पैसे होते तो वो अपनी बहन को बचा सकती थी | उन्हें समज आ गया था की गरीबी सबसे बड़ी बीमारी है जिसको उन्हें खत्म करना है |

कुछ और कदम सफलता की ओर-

कल्पना जी ने कुछ सिलाई मशीन से पैसे कमाना शुरू कर दिए | और वो कि घंटे कड़ी मेहनत करने लगी क्योकि उन्होंने ठान लिया था की इस गरीबी बीमारी को मिटाना है | पर इतने पैसे काफी नहीं थे उनके लिये | इसलिए उन्होंने व्यापार करने का विचार आया |

व्यापार करने के लिए उनके पास पैसे नहीं थे तो उन्होंने सरकार से बहुत मुश्किल के बाद , महात्मा ज्योतिबा फुले के अंतर्गत 50,000 का लोंन लिया | जिससे उन्होंने महज 22 साल की उम्र में फर्नीचर का व्यापार शुरू किया जिसमे उन्हें बहुत सफलता मिली |

एक जमीन ने उनकी सफलता में लगा दिए पंख-

फ़र्निचर के व्यापार करते करते एक दिन उनके पास एक व्यक्ति आये और उन्होंने अपनी जमीन बेचने के लिए बोला | जिसकी कीमत 2.50 लाख रूपए बताया | पर इतने पैसे नहीं थे तो उस व्यक्ति ने बोला की अभी आप सिर्फ 1 लाख रूपए दे दीजिये | कल्पना जी ने जेसे तेसे कर के वो एक प्लाट जमीन खरीद ली |

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परन्तु बाद में उन्हें पता लगा की वो जमीन विवादित है | और सरकार के सभी एक्ट उस जमीन पर लगे हुए थे | 1.5 साल तक मेहनत कर के उन्होंने उस विवादित जमीन से वो सभी एक्ट हटा दिए और उस जमीन से विवादित नाम का शब्द हट गया | जिसकी कीमित 2.50 लाख से 50 लाख हो गयी |

कल्पना जी के साहस ने एक 2.50 लाख की जमीन को 50 लाख कर दिया | उसके बाद उन्होंने उस जमीन पर बिल्डिंग बनाने के लिए एक सिंधी पार्टनर को चुना | जो की बिल्डर थे |

जिसमे उन्होंने उनसे कहा की जगह मेरी है और बनाना आपको है तो पार्टनर मान गया जिसमे उन्होंने प्रतिशत तह किया जिसमे सिंधी पार्टनर का 65% और कल्पना जी का 35% प्रतिशत था | और जब बिलडिंग पूरी हुई उसमे कल्पना जी ने 4.50 करोड़ रूपए कमाये |

इस तरह वो कदम पर कदम आगे बढती गयी | आज वो कमानी ऑफ़ ग्रुप की मालकीन है जिसकी कीमत 1000 करोड़ से भी अधिक है | यह थी 9वी क्लास की एक लड़की का 100 रूपए से लेकर 1000 करोड़ रूपए तक का सफर | जो की हर महिला के लिए प्रेणना है |

हमने आज इस article से क्या सिखा-

हमने success story in hindi में आज कल्पना सरोज की एक जोश व प्रेणना से भरपूर्ण है | हमने आज इस article के माध्यम से सिखा की किस्मत भी हमारा तब साथ देती है जब हम मेहनत करने में कोई भी कसर न रखे |

यह मोटिवेट स्टोरी आपको अपने लक्ष्य की और और प्रेरित करेगी | ऐसे ही मोटीवेट व down to earth success story के लिये नीचे दिये bell icon से हमारी टीम से जुड़े | जिससे हर article आप के फोन तक पहुचे | अपनी राय comment box में जरुर दे | इस article को अपने मित्र तक जरुर शेयर करे | आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद |

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