पोलियो बॉडी में है मन में नहीं और अपनी ज़िद से बन गयी एक CA और IRS अफ़सर-

यह मोटीवेट स्टोरी उन शक्स के लिए है जो भगवान के दिये हुए शरीर को, अपने लक्ष्य की ओर न बढ़ने के लिये अपने शरीर को समस्या मानते है | भगवान यदि एक चीज हमसे लेता है तो बदले में कई चीज दे देता है जो औरो से बहतर हो | आज हम बात करने जा रहे है एक ऐसी लड़की जिसको बचपन से ही पोलियो हो गया |

जिनके शरीर ने उन्हें और लोगो से असामन्य रखा | समाज और दुनिया का एक नजरिया कि यह कुछ भी नहीं कर सकती | कड़ी मेहनत, लगन और विश्वास से समाज और दुनिया को बताया की पोलियो शरीर में है पर मन में नहीं | आप सभी का एक बार फिर everythingpro.in के success story in hindi में स्वागत है |

हमारे हर article लिखने का एक ही मकसद है कि हम अपने शब्दों द्वारा आप सभी के लक्ष्य को पाने के लिए प्रेरित करा सके | चलिए शुरू करते है एक और दिलो में जोश व प्रेणना भर देने वाली मोटीवेट स्टोरी |

बचपन में ही आ गये कष्ट-

हम जिस लड़की के बारे में बात कर रहे है उनका नाम है सारिका जैन (sarika jain)| सारिका का जन्म उडीसा के एक छोटे से कस्बा कातामंजी में हुआ | बचपन में ही महज 2 वर्ष में ऐसी बीमारी हुई जहा माँ-पिता को भी न थी यह जानकारी की यह पोलियो क्या होता है |

माँ-पिता डॉक्टर के पास ले गये | डॉक्टर ने कहा मरेलिया है | और डॉक्टर ने इंजेक्शन दे दिया | जिस कारण से सारिका का 50% शरीर काम करना बंद कर गया |

माँ बाप ने न मानी हार-

50% शरीर काम न करना | हम कल्पना भी नही कर सकते कितना कष्ट देने वाला समय होगा | माँ पिता ने हर हकीम , हर डॉक्टर के पास चक्कर लगा लिये | माँ ने हार न मानी और दिन रात मालिश की और सालो बाद सारिका गिरते हुए , लड़खड़ाते हुए और 4 साल की उम्र में चलना सीखी |

माँ पिता ने कभी भी ऐसास नहीं होने दिया कि वो एक असामन्य लड़की है |  धीरे धीरे समय बिता | और आगे जिंदगी बढती चलो गयी |

दुनिया को किया अनदेखा-

माँ पिता ने स्थनीय स्कूल में ही दाखिला दिलवा दिया जो बहुत अधिक संघर्षपूर्ण था | स्कूल जाती तो बच्चे चिड़ाते , मजाक उड़ाते, रास्ते में कंकर मारते बहुत ही संघर्षपूर्ण वो सफर था | सारिका ने उस वक़्त अपने आप से बोला की यदि आज मैंने इस दुनिया को देख लिया , या अपने आप को रोक रिया तो में आगे नही बढ़ पाऊँगी | और दुनिया को अनदेखा कर, करी अपनी बचपन की पढाई पूरी |

डॉक्टर बनने की थी इच्छा-

सारिका का छोटे से ही मन था कि वो एक डॉक्टर बन सके ताकि वो जिस बीमारी से लड़ रही है | इस तरह से और कोई बच्चा न लड़े | पिता जी से बोला कि में डॉक्टर बनना चाहती हूँ | पिता ने बड़े निराश मन से बोला कि हमारी हेसियत नहीं है कि में तुम्हे डॉक्टर बनाऊ | घर की परिस्थति को देख कर सारिका ने कोमर्स ले लिया |

एक हर पिता का सदेव येही इच्छा रहती है कि उनकी बिटिया पढ़ लिख जाये और एक अच्छे घर में शादी हो जाये | पर यहा सारिका के साथ बहुत समस्या थी क्योकि यहा उन्हें शादी का दूर दूर तक कुछ भी नहीं दिखाई दे रहा था |

दुनिया और समाज का नजरिया था कि घर  पर ही अपना जीवन बिताना है | पर सारिका के अंदर एक जुनून एक विश्वास था कि इस समाज का वो नजरिया बदल सके | और आखिरी में उन्होंने बस अपने आप से बोला की उन्हें बस पढना है |

बड़ी बहन ने अक्सर सारिका को प्रेरित किया | कि यह समय बदल जायेगा | सारिका 4 साल घर पर रहने के बाद उन्हें एक अवसर मिला कि वो CA (Chartered Accountant) का एग्जाम दे सकती है | और CA की पढाई घर से ही शुरू कर दी | उनके गाँव से लघ लघभग 40 बच्चो ने एग्जाम दिया |

सारिका की मेहनत ने CA का एग्जाम top किया | वहा से माँ पिता के अंदर हिम्मत आई कि यह बच्ची कुछ कर सकती है | और आगे पढने का मोका देना चाहिए | सारिका आगे पढने के लिए शहर चली गयी | और CA बन गयी | घर में ख़ुशी का माहोल हो गया |

क्योकि सारिका के घर में किसी ने भी इतनी अधिक पढाई नहीं की थी | और उस लड़की ने कर दिखया जो समाज की नजरो में एक असमान्य लड़की थी |

ट्रेन ने दी यूपीएससी की जानकारी-

शहर से घर, घर से शहर अक्सर वो ट्रेन से जाया करती | एक बार ऐसा हुआ कि वो अपने घर से शहर जा रही थी | और किसी के मुंह से यूपीएससी की पॉवर को जाना | कि आईएएस अफ़सर नाम की भी कोई चीज होती है | सारिका ने उन लोगो से हिम्मत जुटा कर पूछा कि क्या करना होता है IAS बनने के लिये |

लोगो के जबाब आये कुछ नहीं बेटा बस पढना पढता है | और उस वक़्त लोगो की बाते सुन सुन कर | सारिका के मन में दिल और दिमाग पर आ गयी | कि उन्हें बस यूपीएससी का एग्जाम देना है | सारिका CA बन कर घर आई और बोला की उन्हें IAS अफसर बनाना है |

तो घर में सभी ने कहा कि लड़की को भूत चड़ गया है | केसी बहकी बहकी बाते कर रही है | पिता ने बोला हमारी जेसी फैमिली के बच्चे आईएएस नहीं बनते है | हम बहुत साधारण लोग है | ऑफिसर श्रेणी के बच्चे अलग ही परिवार के होते है |

लगन व मेहनत से जीता सभी का दिल-

घर में विवाद होने के बाद | सभी घर वालो ने फैसला किया कि जब सारिका चाहती है तो 1 साल का समय दे देते है | और आखिर में घर वाले राजी हो गये | और सारिका ने घर से ही पढाई शुरू कर दी | जब सारिका की घर की पढाई देख कर घर वालो ने सोंचा यह मेहनत इतना कर रही है |

एक बार फिर बहार भेज देते है | और सारिका अपने ही बल पर दिल्ली पढने आ गयी | और महज एक साल में ही यूपीएससी का एग्जाम पास कर दिया | और सारिका से सारिका जैन डिप्टी कमिश्नर आयकर विभाग में कार्यरत हुई |

हमने आज इस article से क्या सीखा-

हमने इस article के माध्यम से बताने की कोशिश की है कि हम जिस रूप में भी है जिस तरह से भगवान ने हमे बनाया है वो हमारे लक्ष्य तक पहुचने के लिये काफी है | हमे अपने अंदर का हुनर को जानना है और बस अपने लक्ष्य की और बढ़ना है | आप अपना काम करिये और परमात्मा अपना काम करेंगे | और एक दिन सफलता अवश्य मिलेगी |

उम्मीद करते है हम की यह मोटीवेट सारिका जैन की कहानी आपको आपके लक्ष्य तक पहुचाने में मदद करेगी | ऐसे ही interested व मोटीवेट article पढने के लिए हमारी website से जुड़े रहे | व अपने मित्रो व परिवार तक इस मोटीवेट कहानी को जरुर शेयर करे | आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद |

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