ट्रक चालक का बेटा बना IAS अफसर-

आज का article आपको बतायेगा कि जब हालात गंभीर हो तो मेहनत खुदवा खुद होने लगती है | आज हम बात कर रहे है एक ट्रक ड्राईवर के बेटे हरविंदर सिंह की |

जो एक प्राइवेट जॉब करते वक़्त भी उन्होंने अपने सपने को पंख लगाये | हरविंदर सिंह की भी कहानी काफी रोचक व मोटीवेट है | जो हम युवा को प्रेरित करेगी अपने बढ़ते लक्ष्य की ओर-

बचपन में ही दिया कुदरत ने संकेत-

जब हरविंदर सिंह छोटे थे | और उनके घर की इस्थिति कुछ खास नहीं थी | घर अधिक बना हुआ नहीं था | घर में रसोई घर नहीं थी | उनकी माँ जमीन पर ही खाना बनाती | एक दिन हुआ ऐसा कि उनकी माँ खाना बनाने के लिए पानी भरने गयी | और अचानक से हरविंदर सिंह की रोने की आवाज आती है |

हरविंदर सिंह उस वक़्त महज 3 वर्ष के थे | हरविंदर सिंह ने अपने हाथ की उंगलिया गर्म तेल में डाल दी थी | जिस वजह से उनके हाथ की 3 उंगलिया बचपन से ही सीधी नही रही | पर हरविंदर सिंह को नहीं पता था कि यह हादसा ही उन्हें एक दिन IAS अफसर बना देगा |

आप सभी का एक बार फिर everythingpro.in के success story in hindi में आपका स्वागत है | चलिए शुरू करते है एक और प्रेणना से भरने वाली मोटिवेट स्टोरी |

धीरे धीरे समय बिता हरविंदर सिंह की पढाई स्थानीय स्कूल से ही हुई | उसके बाद हरविंदर सिंह बोर्डिंग स्कूल में चले गये | वहा उनके मन में देश प्रेम के प्रति आकर्षित हुए | और उन्होंने विचार किया कि वो भारतीय सेना में अपना भविष्य बनायेंगे | व देश को अपनी सेवा देकर सोभाग्य महसूस करेंगे |

हरविंदर सिंह ने 12वी पास होने के तुरंत बाद NDA (National Defense Academy) का एग्जाम दिया | हरविंदर सिंह ने NDA के सभी एग्जाम , इंटरव्यू सब पास कर लिये | और वो फिजिकल टेस्ट के लिये इलाहाबाद गये |

जहा उन्होंने सभी टेस्ट पास कर ही लिए थे कि अचानक डॉक्टर की नजरे उनके हाथ पर गयी | और उन्होंने इस हाथ को देख कर हरविंदर से बोल दिया कि इस हाथ की वजह से आप भारतीय सेना में नहीं जा सकते | हरविंदर सिंह का सपना टूट गया | और वो निराश उदास हो गये |

हरविंदर सिंह का उस वक़्त का दुःख हम सब महसूस कर सकते है | कि इतनी मेहनत करने के बाद एक किसान ट्रक ड्राईवर का लड़का सभी एग्जाम को कड़ी मेहनत से पास करने के बाद भी उनका सिलेक्शन नहीं हुआ |

जब वो वापिस जा रहे थे तो उन्होंने उन डॉक्टर से बोला कि सर में क्या करू | जो मेरा सिलेक्शन हो जाये | उन्होंने बोला कि आप फिर से एग्जाम दे और एग्जाम देने से पहले अपने हाथ की सर्जरी करवा ले | उसके बाद आपको सिलेक्शन मिल जयेगा |

हरविंदर सिंह का इलाहाबाद से एक खास रिश्ता-

हरविंदर सिंह ने NDA (National Defense Academy) और AIEEE (All India Engineering Entrance Examination) दोनों के entrance एग्जाम दिये | हरविंदर सिंह वापिस इलाहाबाद से आ गये | और उन्होंने फिर एक साल बाद अपने हाथ की सर्जरी करवा कर , एक बार फिर NDA पास कर के फिर एक बार इलाहाबाद अपने सपने को पूरा करने गये |

वही शहर, वही जगह, वही इन्सान और वही डॉक्टर | उन्होंने देखा कि हरविंदर सिंह के हाथ पर operation के करण हाथ में टाँके लगे हुए थे | डॉक्टर ने हरविंदर सिंह की तरफ देखा और बोला बेटा में खुद चाहता हूँ कि तुम को पास करू |

इस हाथ की वजह से मुझे नहीं लगता की तुम ट्रेनिंग भी पूरी कर पओगे | और एक बार फिर डॉक्टर ने मना कर दिया | अपने आप से नाराज, उदास, दुखी हो कर हरविंदर सिंह वापिस आ गये | और इंजीनियरिंग में दाखिला ले लिया | और अपनी इंजीनियरिंग पूरी करी |  

इंजीनियरिंग करते वक़्त उन्हें ख्याल आया कि उनके घर की क्या हालात है | और महसूस किया कि उनके पिता जी खेती के साथ साथ ट्रक चलाकर कैसे अपने परिवार को पाल रहे थे | हरविंदर सिंह ने विचार किया की उन्हें जल्द से जल्द पैसे कमा कर घर की मदद कर सके | उन्हें अपने सपने रख कर पहले वो खुद आत्मनिर्भर बने | ताकि उनके घर पर थोड़ी सी मदद हो सके |

2013 में इंजीनियरिंग खत्म हो जाने के बाद उनकी पहली प्राथमिकता थी कि पैसे कमाना | पर प्लेसमेंट में अधिक कम्पनी न आने के कारण उनकी जॉब नहीं लग सकी | वापिस घर गये और एक मोका मिला एक प्राइवेट कॉलेज में पढ़ाने का जहा उन्होंने पढाया | उसके बाद एक प्राइवेट सेक्टर में सिविल इंजिनियर की जॉब वो करने लगे |

किस्मत एक बार फिर ले आई इलाहबाद-

एक बार फिर इलाहाबाद ले आई उनकी जिंदगी | एक और प्राइवेट सेक्टर में जॉब करने इलाहाबाद आ गये | जॉब करते करते उन्हें ऐसास हुआ कि उन्होंने अपने लिए कुछ मकसद बनाये थे और वो अपने सपनों से कही न कही दूर हो रहे है |

इस बीच प्राइवेट जॉब करते करते उन्हीने अपने सपनो के लिए पढाई शुरू कर दी | पर प्राइवेट जॉब में बहुत अधिक प्रेसर होने के कारण वो अपने सपने पर ध्यान नहीं दे पा रहे थे | पर उसके बाद भी वो दिन में जॉब करते और रात में पढाई | पर प्राइवेट जॉब में आदमी हतास हो जाता है |

उन्होंने विचार किया इलाहाबाद में ही कि भले ही उनका सिलेक्शन भारतीय सेना में नही हुआ | पर और भी तरीके है जिस से वो देश की सेवा कर सकते है | और तब उन्होंने सिविल सर्विसेज में जाने का विचार किया | और लग गये सपनो की ओर |

जब लक्ष्य हो मजबूत तो किस्मत भी साथ देगी-

कहते हेना जब आप मेहनत करते है तो किस्मत भी कहती है कि मेहनत तो कर में तेरा इंतजार कर रही हूँ | हरविंदर सिंह के साथ भी हुआ | वो प्राइवेट जॉब करने के बावजूद भी अपनी पढाई को कई घंटे देते | पर प्राइवेट जॉब के कारण वो इतनी मेहनत नहीं कर पाते जितना वो करना चाहते थे |

उनकी मेहनत और किस्मत ने साथ देते हुए उन्हें जम्मू कश्मीर स्टेट गवर्नमेंट PWD में सिलेक्शन हो गया | जॉब जॉइन करने के पहले ही दिन से हरविंदर सिंह ने बहुत मेहनत की | और यूपीएससी में 2016 से पहला प्रयास किया पर सफलता नहीं मिली |

फिर 2017 में प्रयास किया फिर भी नहीं मिली सफलता | फिर हरविंदर सिंह ने अपने आप से बोला की बस एक बार और प्रयास और फिर 2018 के यूपीएससी में 256 रेंक प्राप्त की | हरविंदर सिंह को एक आईएएस अफ़सर बना दिया |

हमने आज इस article से क्या सिखा-

आज इस article से हमने 2 बाते सीखी | पहली हमे एक आखरी प्रयास जरुर करना चाहिए | और दूसरी भले ही हम अपने पेरो पर खड़े हो जाये पर हमे अपने लक्ष्य से नहीं भटकना चाहिए | हरविंदर सिंह चाहते तो PWD जॉब से ही अपना जीवन यापन कर सकते थे | पर उनका लक्ष्य एक आईएएस अफसर बनना था |

उम्मीद करते है यह कहानी भी नई पीढ़ी के लिये प्रेणना होगी | व उनके लक्ष्य तक पहुचाने तक मदद करेगी | अपने मित्र व परिवार के साथ जरुर share करे | ऐसे ही interested व मोटीवेट स्टोरी के लिए हमारी website से जुड़े रहे | आप सभी का बहुत बहुत धन्यवाद |

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