अप्रैल से जुलाई तक मनाली की वादियों की सुन्दरता-

आमतौर पर कई लोग कुल्लू और मनाली (manali) का नाम साथ- साथ लेते है | कई लोग तो यह जानते है कि ये दोनों ही नाम एक ही है , जबकी हकीकत में ऐसा नहीं है |

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आमतौर पर कई लोग कुल्लू और मनाली (manali) का नाम साथ- साथ लेते है | कई लोग तो यह जानते है कि ये दोनों ही नाम एक ही है , जबकी हकीकत में ऐसा नहीं है |

कुल्लू से 40 किलोमीटर दूर स्थित इस सुंदर स्थान के प्राकृतिक सोंदर्य को जब अंग्रजो ने देखा तो उनका मन डोल गया |इस मोहक और स्वास्थ्यवर्धक  स्थान का लाभ उठाने के उद्देश्य से उन लोगो ने यहाँ का विकास किया | आज यह देश का एक प्रमुख पर्यटन केंद्र बन चूका है |

बर्फबारी में आनंद लेता एक जोड़ा

हनीमून मनाने के लिए जानेवाले नवयुगलो को यह स्थान बहुत ही अधिक प्रिय है | अधिकतर नये युवाओ और युवती को पहाड़ी क्षेत्र से अधिक ही लगाव होता है | क्योकि पहाड़ी इलाके की सुन्दरता कुछ ऐसी ही होती है की हर किसी का मन मोहक ले |  यहाँ व्यास नदी के तट पर खड़े लम्बे लम्बे चीड़ के पेड़ भी सुन्दरता में चार चाँद लगाते है |

मनाली (manali) जाने का बेहतर समय-

कार के अंदर से लिया गया मनाली का खुबसुरत द्रश्य

मनाली घूमने के लिए सर्दियों में सितंबर के अंत से फरवरी के मध्य तक व गर्मियों में अप्रैल के मध्य से जून के मध्य तक का समय बेहतर रहता है | यदि आपको बर्फबारी का लुफ्त उठाना चाहते है तो जनवरी की  शुरुवात में जाकर बर्फबारी का आनंद ले सकते है |

मनाली (manali) से कुछ प्रमुख नगरो से दूरी –

  • धर्मशाला – 253 किलोमीटर
  • शिमला – 260 किलोमीटर
  • चंडीगढ़ -310 किलोमीटर
  • सहारनपुर -419 किलोमीटर
  • दिल्ली – 560 किलोमीटर

मनाली (manali) में देखने के लिये प्रमुख स्थल-

मनाली में देखने के लिये अनेक स्थल है | उनमे से कुछ प्रमुख स्थल इस प्रकार है –  

वशिष्ठ के एक मंदिर का द्रश्य

वशिष्ठ- 

मनाली से 3 किलोमीटर दूर व्यास नदी के तट पर स्थित  गर्म पानी के वजह से प्रिसद्ध है और राम मन्दिरों के कारण भी लोकप्रिय है | यहाँ राज्य पर्यटन निगम ने एक स्थान परिसर बनवाया है जिसमे पर्यटक प्राकृतिक रूप से गर्म पानी निकलने से नहाने का आनंद प्राप्त करते है |

जगत सुख-

सूर्य देवता के दर्शन

व्यास नदी पर मनाली से 6 किलोमीटर दूर इस स्थान पर भी चारो तरफ प्राकृतिक सोंदर्य बिखरा पड़ा है | यहाँ भी कुछ प्रमुख देखने लायक मन्दिर है जिसमे शकारा शेली में बना शिव मन्दिर प्रमुख है |

कोठी-

मनाली से मात्र 12 किलोमीटर दूर इस स्थान के भी प्राकृतिक सुषमा बिखरी हुई दिखती है | यहा से महज एक किलोमीटर आगे संकरी घाटी है , जिसमे 30 मीटर नीचे व्यास नदी बहती है | इस खाई के दोनों और चट्टानें है उन चट्टनो पर काफी संख्या में कबूतर रहते है | इस द्रश्य को देखना पर्तको को कभी अच्छा लगता है |

राहला फाल –

कोठी से 2 किलोमीटर आगे स्थित इस स्थान पर 50 मीटर की उचाई से व्यास नदी की तेज जलधारा नीचे गिरती है | यह द्रश्य को देखना बहुत ही सुहाना लगता है | यहा एक पिकनिक स्थल भी है | जहा काफी संख्या में लोग पहुचते है |

गर्म चाय की चुस्की और मनाली की ठंडक

सोलंग घाटी –

यह मनाली से 13 किलोमीटर दूर है | इस घाटी के पास  खड़े हो कर हिमाच्छ्दित पर्वत श्रंखलाए तथा ग्लेशियर देखने का आनंद लिया जा सकता है |

रोहतांग दर्रा-

अटल टर्नल

यह मनाली से 50 किलोमीटर दूर 4000 मीटर से भी अधिक उचाई पर स्थित है | काफी ऊँची-ऊँची बर्फ से ढकी पर्वत-श्रंखलाए यहा से दिखती है |

पहले तो यहा जाना इतना खतरनाक था कि इसे “मोत का द्वार ’’ बोला जाता था | लेकिन अब ऐसी बात नहीं है |

मनाली (manali) पहुचने के साधन-

फ्लाइट-

मनाली पहुचने के लिये सभी साधन कुल्लू से है | हवाई जहाज द्वारा कुल्लू मनाली एअरपोर्ट जो की भुंतर में स्थित है |  दिल्ली से कुल्लू के लिये हर दिन एयरलाइन्स की फ्लाइट मोजूद है | जिसकी शुरुआत फ्लाइट का किराया 5,268 रुपय आयेगा |

ट्रेन-

यदि आप ट्रेन से कुल्लू से मनाली जाना चाहते है | दिल्ली से कुल्लू का ट्रेन से सफर लघभग 16 घंटे का सफर है | जो कि दिल्ली से कुल्लू तक ट्रेन से दूरी लघभग 540 किलोमीटर है |  आप दिल्ली से हर रोज कुल्लू के लिये कई ट्रेन जाती है | जिसमे से कालका शताब्दी , हिमालयन क्वीन , पश्चिम एक्सप्रेस, हावड़ा दिल्ली कालका मेल आदि है |

स्टेशन के गर्म पनीर पकोड़े के साथ गर्म चाय

नोट : यदि आप दिल्ली से कुल्लू के लिये ट्रेन से सर्दियों में अपने पूरे परिवार के साथ सफर तह करते है और साथ ही हर स्टेशन के गर्म चाय और पकोड़े के साथ आपका सफर और रंगीन बना देता है | जिसका शयद आनंद आप फ्लाइट में नहीं ले सकते |

अपना वाहन-

मनाली का द्रश्य

अपना वाहन अपना ही होता है और यदि परिवार के साथ या नये शादी के जोड़े अपने वाहन से जाये तो सफर बहुत ही रोमांचक व मधुर हो जाता है | दिल्ली से कुल्लू तक अपने वाहन से 12 घंटे की दूरी तय होती है | दिल्ली से पानीपत , सोनीपत कुरुक्षेत्र के रास्ते होते हुये कुल्लू पहुचा जा सकता है | रास्ते में आपको कई प्रकार के ढाबे खाने के लिये मिल जायंगे | जिनका भी लुफ्त लेकर अपने सफर को और हसीन बना सकते है |

यहां भी अपने परिवार के साथ घुमने जाये –

कुल्लू में ठहेरने के लिये होटल –

मनाली के होटल का एक द्रश्य

हालाँकि सुबह कुल्लू से मनाली के लिये रवाना होने पर, दिन-भर मनाली घुमने के बाद , रात तक वापस कुल्लू लोटा जा सकता है | लेकिन आप लोगो का कार्यक्रम मनाली होते हुए आगे बढ़ने का या मनाली में ही रात-भर ठहर कर वहाँ के सोंदर्य को भरपूर देखने का हो , तो ऐसा भी कर सकते है | मनाली में भी कई अच्छे-अच्छे (हर दर्जे के ) होटल है |

खुबसूरत वादिया

इनमे से प्रमुख है – होली डे इन , मनाली अशोक ,हिमालयन , अनुपम , चंदन , हिमगिरी आदि |

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